
इस साल के अंत तक बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। चुनाव में कुछ महीनें शेष हैं। इसलिए तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों ने बिहार में तंबू गाढ़ दिए हैं और उनके नेताओं ने अपने-अपने पजामें का नाड़ा कस लिया है। बिहार में मोहरे बिछाने शुरु कर दिए गए हैं। पार्टियों के बीच सांठ-गांठ और मेल-मिलाप की प्रक्रिया भी शुरु हो गयी है।
जदयू-भाजपा थोड़ी-बहुत तकरार के बाद फिर गठजोड़ कर चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है। इस गठबंधन के पास मुख्यमंत्री के रुप मे नीतिश कुमार का चेहरा है। नीतिश भी गला फाड़फाड़ कर शाइनिंग बिहार का नारा लगा रहे हैं।
दूसरी पार्टी आरजेडी है। इस पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री लालू-राबड़ी के पास नीतिश को गलियाने के सिवा कुछ नहीं है। वे एक बार फिर मुख्यमंत्री के सपने के साथ मैदान में उतरने की तैयारियां कर रहे हैं।
बिहार में चुनाव हो और जात-पात की बातें ना हो, ऐसा संभव नहीं। जातियां तो बिहार की राजनीति की धुरी है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महादलित का कार्ड है, तो रामविलास पासवान के दलित कार्ड के सहारे अपनी शाख बचाना चाहते है। कांग्रेस के पास भी दलित कार्ड के रूप में इक्का है जो संभवतः संसद सत्र के बाद चला जा सकता है। लालू यादव मुस्लिम-यादव-पिछेड़ के सहारे अपनी विरासत को पाने की लालसा लिए बैठे है। लेकिन असल बात तो देश की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस की है।
पिछले दो-एक सालों से कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी की रणनीति बिहार और उत्तर प्रदेश को जीतने की हैं। बिहार चुनाव बेहद करीब है और कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा तलाशने में लगी है। सुगबुगाहट है कि सासाराम से सांसद और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतार जा सकता है। मीरा कुमार बिहार में मुख्यमंत्री का चेहरा भी बन सकती हैं। कांग्रेस अगर दलित कार्ड का चलती है तो ये बिहार चुनाव का इक्का साबित होगा। संभव है कि संसद के मानसून सत्र के बाद मीरा कुमार लोकसभा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें। ऐसी मुझे उम्मीद है।
पार्टी में चुनावी रणनीति तैयार करने वालों का मानना है कि मीरा कुमार चका नाम जुड़ जाने से कांग्रेस की नई सोशल इंजीनियरिंग सामने आ सकती है। लेकिन सवाल है कि क्या मीरा कुमार सासाराम के अलावा पूरा बिहार जीता सकती है इसमें थोड़ा संदेह है।
उल्लेखनीय है कि इस समय इस राज्य में पार्टी अजीबोगरीब अंतर्कलह से गुजर रही है। मीरा कुमार को आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी के चेहरे के तौर पर पेश करने की रणनीति की सुगबुगाहट है।
मीरा कुमार के नाम पर कांग्रेस को बिहार में उम्मीद से ज्यादा सीटें ले सकती है। साथ ही बिहार में राहुल फैक्टर भी संजीवनी का काम करेगा। लेकिन हकीकत तो संसद सत्र के बाद मालूम चलेगी, जब कांग्रेस अपना आखिरी पत्ता खोलेगी।
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