दीवारों का रंग, फीका पड़ने लगा है।
कहीं कोने में,
मकड़ी ने जाला बुना है अभी।
किवाड़ से रोशनी,
बस झांकती है अंदर।
टेबिल पर रखी तस्वीर से,
धूल लिपटती जा रही है।
सुबह से शाम के बीच,
समय कहीं फंस गया है।
एक उदासी चुपके से,
बढ़ी आ रही है।
दीवारों का रंग,
फीका पड़ने लगा है।
समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है .. रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर भाव्…………………रक्षाबंधन की बधाई
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